Foundation of Yoga

Foundation of Yoga

योग का इतिहास १

योग का इतिहास

 

प्रचीनतम साहित्य वेदों में ही सबसे पहले योग की चर्चा की गयी है, ऋग्वेद के प्रथम व नवम् मण्डल में योग की चर्चा की गयी है, वेदों का मुख्य विषय ब्रहम ज्ञान या इसके अतिरिक्त ज्ञान काण्ड, कर्मकाण्ड आदि को बढ़ने में सहायक था, उस समय जो भी मनुष्य सांसारिक बन्धनों में बधें हुए थें उनमें चित्त के ज्ञान का विकास नहीं सकता था, उनके चित्त की शुद्धि के लिए दान, जप, यज्ञ जैसे आदि कर्मकाण्ड बताये गये थे, जब व्यक्ति की चित्त शुद्धि होकर उनमें ज्ञान ग्रहण करने की क्षसता उप्पन्न होने लगी, फिर उनको कर्मकाण्डों से हटाकर परमात्मा स्वरूप में लाने का प्रयास किया गया।
ऋग्वेद में भी इसकी चर्चा की गयी है, कुछ विद्वानों द्वारा कहा गया है कि योग सिन्धु घाटी सभ्यता से प्रारम्भ हुआ है, सिन्धु घाटी सभ्यता के अनेक जिवाष्म अवषेष एवं मुहरे भारत में योग की मौजूदगी के संकेत देती है। मोहनजोदडो़ में भी कुछ नर देवी देवताओं की योगमुद्रा में बैठी हुई मूर्तियां प्राप्त हुई है, जिससे यह सिद्ध होता है कि सिन्ध घाटी के लोग यौगिक विचार धारा के भलिभाति परिचित थे, सिन्धु घाटी सभ्यता कोई वैदिक सभ्यता नहीं थी, परन्तु यह वैदिक सभ्यता का ही एक अंग था।

यह उल्लेखनीय है कि प्राचीन योग महान् वैदिक परम्परा का हिस्सा रहा है। पतंजलि ने तो बाद में इस शिक्षा का संकलन किया था। यौगिक शिक्षा के अन्तर्गत पतंजलि योग के समस्त पहलू शामिल हैं, जो पतंजलि से पहले वाले साहित्य में विद्यमान हैं, जैसे पुराण, महाभारत और उपनिषद् जिसमें पतंजलि का नाम बाद में आता है। योग का प्रणेता हिरण्यगर्भ को बताया जाता है, जो ब्रह्मांड में रचनात्मक और विकास मूलक शक्ति को निरुपित करते हैं।

योग को और अधिक पीछे जाकर ऋग्वेद में भी ढूंढा जा सकता है, जो सबसे प्राचीन हिंदु ग्रन्थ है, जिसमें हमारे मन और अन्तर्दृृष्टि को सत्य अथवा वास्तविकता के प्रकाश के साथ सम्बद्ध करने की बात कही गई। प्राचीन काल में योग गुरुओं में अनेक प्रसिद्ध ऋषियों का नाम लिया जा सकता है जैसे वसिष्ठ, याज्ञवल्क्य तथा जैगीशव्य। योगियों में जो योगेश्वर कहलाते हैं वह स्वयं श्रीकृष्ण है, जो भगवद्् गीता के नायक हैं। भगवद् गीता कोयोगशास्त्रभी कहा गया है, जिसके अंतर्गत योग पर प्रामाणिक कार्य उपलब्ध है। भगवान् शिव भी सर्वाधिक महान् योगी या आदिनाथ हैं। भारत में योग मनुष्य के उस क्रियाकलाप का हिस्सा रहा है, जिसके द्वारा आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचा जा सकता है। योग का इतिहास 5 वर्गों में विभाजित किया जा सकता हैः

  1. वैदिक काल
  2. पूर्व प्राचीन काल
  3. प्राचीन काल
  4.  मध्यकाल
  5.  आधुनिक काल