Hatha yoga text Siddhasiddhanta paddhati in Hindi notes for UGC NET JRF in Yoga

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सिद्ध सिद्धांत पद्धति

महर्षि गोरक्षनाथ कृत

महायोगी श्री गोरक्षनाथ द्वारा रचित ग्रंथ सिद्ध सिद्धांत पद्धति योग विद्या का दुर्लभ ग्रंथ है। इस ग्रंथ में योग के विभिन्न आसनों से अलग देह में प्राण तत्व की व्यापकता और शरीर में पिंड की उत्पत्ति , पिण्ड का विचार, पिंड के विषय में सही ज्ञान इत्यादि विषयों पर व्यापक प्रकाश डालते हुए जिस प्रकार निरूपण महायोगी गोरखनाथ ने किया है वह बहुत ही अद्भुत एवं अभूतपूर्व है।

महायोगी श्री गोरक्षनाथ जी ने सिद्ध सिद्धांत पद्धति के अंतर्गत कुल छह उपदेशों में निम्नलिखित विषयो का विवेचन किया गया है।

प्रथम उपदेशपिण्डोत्पति
शरीरोत्पति निरूपण
परब्रह्म की आदिम पञ्च शक्तियां एवम् गुण
द्वितीय उपदेशपिण्ड विचार
तृतीय उपदेशपिण्डज्ञान
चतुर्थ उपदेशपिण्डधार
पञ्चम उपदेशपिण्डपदों में एकता
द्वादश वर्षों में क्रमशः योग सिद्धि
पंचविध गुरुकुल संतान (सिद्ध वंश परंपरा)
पञ्च संतान
सदगुरु के लक्षण
षष्ठ उपदेश
अवधूत योगी के लक्षण
अवधूत के लक्षण
अवधूत की सर्व स्वरूपता
परम पद की महिमा
सिद्ध सिद्धांत पद्धति का महात्म्य

उक्त उपदेशो उन्होंने जगत में नित्य निर्विकार परम सत्ता को ही जीवात्मा एवं योग साधना हेतु मुख्य मार्ग स्वीकार किया है । उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब साधक को अंड एवं पिण्ड का सम्यक ज्ञान प्राप्त हो जाता है तब वह परम तत्व एवं परमात्मा की दिव्य सत्ता को जान जाता है और उसे प्राप्त करता है ।

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